
लखनऊ।
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राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने आठवें वेतन आयोग के लिए वित्त विभाग को भेजा सुझाव राष्ट्रीय वेतन नीति निर्धारण के लिए दिया सुझाव न्यूनतम वेतन पर भी सुझाव दिए
पे स्ट्रक्चर ,फिटमेंट फार्मूला, संविदा कर्मियों के विनियमितिकरण की नीति निर्धारण करने सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपने सुझाव दिए।
लखनऊ 15 फरवरी,
आठवें वेतन आयोग के गठन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त विभाग ने प्रदेश में कार्यरत कुछ महत्वपूर्ण कर्मचारी संगठनों से आठवें वेतन आयोग में शामिल किए जाने हेतु सुझाव मांगे हैं। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश की तरफ से प्रदेश में कार्यरत लगभग 12 लाख राजपत्रित एवं राजपत्रित कर्मचारियों के बारे में सुझाव प्रेषित किए गए हैं। आज 15 फरवरी को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी एवं महामंत्री अरुणा शुक्ला ने वित्त विभाग के विशेष सचिव पुष्पराज सिंह से मुलाकात कर राज्य कर्मचारियों की तरफ से दिए गए सुझावों पर विचार विमर्श किया। संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने लखनऊ में एक प्रेस विज्ञप्ति में अवगत कराया है कि भारतवर्ष में कोई भी राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन नीति निर्धारित नहीं है, जिसके कारण अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग न्यूनतम वेतन मिल रहा है ।दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी की भी आकांक्षाएं अच्छा जीवन जीने की होती हैं। जे एन तिवारी ने 2019 के न्यूनतम मजदूरी कोड को तात्कालिक प्रभाव से लागू किए जाने के का सुझाव देते हुए राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन नीति निर्धारण करने का सुझाव दिया है l
आठवें वेतन आयोग द्वारा न्यूनतम वेतन का निर्धारण सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है ।न्यूनतम वेतन निर्धारण के लिए सरकार ने सातवें वेतन आयोग में भारतीय श्रम कॉन्फ्रेंस 1957 के फार्मूले को आधार बनाया था जिसके आधार पर एक दैनिक मजदूर की नित्य प्रति की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तीन यूनिट के एक परिवार के लिए न्यूनतम वेतन निर्धारण किया गया था। न्यूनतम वेतन के निर्धारण में भोजन संबंधी सामग्री के अलावा पोषण से संबंधित सामग्री भी सम्मिलित की गई थी। यह फार्मूला एकरॉयड फार्मूला के नाम से जाना जाता है ।आठवें वेतन आयोग से यह उम्मीद की जाती है कि एकरॉयड फार्मूले के आधार पर ही वर्तमान बाजार दर के दृष्टिगत न्यूनतम वेतन का निर्धारण किया जाएगा। एकरॉयड फार्मूले के अनुसार 18000 के न्यूनतम वेतन को 60000 तक संशोधित किया जा सकता है। इसी प्रकार पेंशन में 9000 की पेंशन को 30000 तक संशोधित किए जाने का सुझाव दिया गया है। आठवें वेतन आयोग में संयुक्त परिषद ने 3.33 का फिटमेंट फार्मूला सुझाया है। यह फिटमेंट फार्मूला प्रत्येक व्यक्ति की प्रतिदिन 2700 कैलोरी के भोजन उपयोग पर आधारित है। छठे वेतन आयोग ने नगर प्रतिकर भत्ता को समाप्त करते हुए परिवहन भत्ता की सिफारिश किया था जिसको सरकार ने मान लिया था परंतु उत्तर प्रदेश में 2020 तक नगर प्रतिकर भत्ता मिल रहा था कोविद संकट काल में राज्य कर्मचारियों का नगर प्रतिकर भत्ता समाप्त कर दिया गया। संयुक्त परिषद ने सुझाव दिया है कि आठवें वेतन आयोग में परिवहन भत्ते को दुगना करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार में भी परिवहन भत्ता ही लागू किया जाए l
आवास भत्ता के संबंध में संयुक्त परिषद ने न्यूनतम 30% के दर से आवास भत्ता देने की सुझाव प्रस्तुत किया है ।इसके अलावा यूनिफॉर्म एलाउंस, यात्रा भत्ता, शिक्षा भत्ता, धुलाई भत्ता, डेपुटेशन भत्ता, व्हीकल भत्ता, सहित जो भी भत्ते केंद्र सरकार में मिल रहे हैं उनकी दरों को 5 गुणा करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार में भी देने का सुझाव दिया गया है।
सरकारी कर्मचारियों को कुछ अग्रिम दिए जाते हैं। संयुक्त परिषद ने साइकिल अग्रिम, यात्रा अग्रिम, प्रशिक्षण अग्रिम, मोटर कार अग्रिम, मोटरसाइकिल/ स्कूटर/ मोपेड अग्रिम, व्यक्तिगत कंप्यूटर अग्रिम, आवास निर्माण अग्रिम ,आदि अग्रिम को राज्य कर्मचारियों के लिए उपलब्ध कराए जाने का सुझाव दिया है।
संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए नीति बनाने का सुझाव भी राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद द्वारा दिया गया है। संयुक्त परिषद की महामंत्री अरुणा शुक्ला ने अवगत कराया है कि 2001 के बाद संविदा कर्मियों के नियमितीकरण नियमावली का प्रख्यापन नहीं किया गया है जबकि 2008 से समाज कल्याण एवं जनजाति विकास विभाग में समाज के निचले तबके के बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए आश्रम पद्धति विद्यालय खोले गए ।इन विद्यालयों में 2017 तक लगभग 1100 संविदा शिक्षक कार्य कर रहे हैं। इन सभी संविदा शिक्षकों को सृजित पद के सापेक्ष निकली गई विज्ञप्ति के आधार पर नियमानुसार गठित चयन समिति के माध्यम से नियुक्त किए जाने की परिस्थितियों एवं राज्य कर्मचारियों की भांति मिल रहे वेतन एवं महंगाई भत्ते के दृष्टिगत नियमावली बना कर नियमित किए जाने का सुझाव भी संयुक्त परिषद ने वित्त विभाग को दिया है। संयुक्त परिषद के अध्यक्ष ने अवगत कराया है कि यद्यपि सातवां वेतन आयोग 2014 से लागू किया जाना चाहिए लेकिन सातवां वेतन आयोग 2016 से लागू किया गया और सरकार हर 10 वर्ष पर वेतन आयोग के गठन की पर नीति का पर काम कर रही है अतः आठवें वेतन आयोग का लाभ सभी कर्मचारी , जिनमे संविदा कर्मी भी शामिल है, को 1 जनवरी 2026 से दिए जाने की सुझाव दिया गया है। छठे वेतन आयोग ने कर्मचारियों की वेतन वृद्धि तीन प्रतिशत रखा था जिसको सातवें वेतन आयोग ने संशोधित नहीं किया वर्तमान में बढ़ती हुई महंगाई को देखते हुए सालाना वेतन वृद्धि पांच प्रतिशत किए जाने का सुझाव किया गया है।
एसीपी व्यवस्था के अंतर्गत 4, 10 ,16 ,22 एवं 28 वर्ष की सेवा पर अगला पदोन्नति वेतनमान देने का सुझाव दिया गया है। पुरानी पेंशन व्यवस्था के संबंध में संयुक्त परिषद ने कर्मचारियों के लिए नई अथवा पुरानी पेंशन व्यवस्था चुनने का विकल्प दिए जाने का सुझाव दिया है ।देश में उन्नत चिकित्सा सुविधा एवं पौष्टिक खानपान के आधार पर आम आदमी की औसत आयु में वृद्धि हो गई है। ऐसे में राज्य कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आए 60 वर्ष से बढ़कर 62 वर्ष किए जाने का प्रस्ताव भी दिया गया है। पेंशन से संबंधित सुझाव देते हुए संयुक्त परिषद ने 70 साल की उम्र प्राप्त कर लेने के बाद पेंशन में न्यूनतम 20% और 95 वर्ष तक जीवित रहने के बाद 100% पेंशन में बढ़ोतरी का सुझाव दिया है।
राज्य कर्मचारी के अवकाश खाते में प्रतिवर्ष 31 दिन अर्जित अवकाश जमा होता है ।वर्तमान में 300 दिन तक का ही अवकाश कर्मचारी के अर्जित खाते में माना जाता है, जबकि 30 साल की सेवा में कर्मचारी 930 दिन की छुट्टी अर्जित करता है। सुझाव दिया गया है कि कर्मचारियों के खाते में जमा अवकाश की सीमा 300 दिन से बड़ा करके 500 दिन कर दिया जाए।
संगठनों में काम करने वाले पदाधिकारियों के लिए 14 दिन विशेष अवकाश दिए जाने का सुझाव भी दिया गया है। महिला कर्मचारियों के संबंध में सुझाव देते हुए राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की महामंत्री अरुणा शुक्ला ने अपने सुझाव में कहा है कि महिला कर्मचारियों के लिए रात्रिकालीन ड्यूटी से छूट दिए जाने ,रात्रि 8:00 के बाद उनका कार्य स्थल पर रोके नहीं जाने,
चाइल्ड केयर लीव तीन बच्चों तक दिए जाने, चाइल्ड केयर लीव की सीमा 730 से बढ़कर 1095 दिन किए जाने तथा महिला संविदा कर्मियों को भी चाइल्ड केयर लीव दिए जाने का सुझाव दिया गया है। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मजदूरी तय करने तथा उनके समायोजन के लिए नियमावली बनाए जाने का सुझाव भी दिया गया है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के इस प्रस्ताव को तैयार करने में जहां संयुक्त परिषद के अध्यक्ष एवं महामंत्री ने परिश्रम किया है वहीं संयुक्त परिषद से संबद्ध संगठनों के पदाधिकारी विशेष कर वरिष्ठ उपाध्यक्ष नारायण जी दुबे, उपाध्यक्ष त्रिलोकी नाथ चौरसिया ,रिंकू राय, प्रीति पांडे ,नीरज चतुर्वेदी, अवधेश कुमार मिश्रा, प्रेमानंद चतुर्वेदी, अखिलेश सिंह एवं हर्ष कुमार ने भी अपना योगदान दिया है।
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